4 Short Fantasy Stories in Hindi Font

 Please, अगली बार तुम दिन में आना

मौसम की गर्मी थी या मन की बैचेनी, मालूम नहीं | चार रोज़ से ठीक से नींद नहीं आई थी | लेकिन कल बहुत अच्छी और गहरी नींद आई थी | रात को बैठा Laptop पर कुछ काम कर रहा था, काम में मन नहीं लगा तो उठकर Balcony में आ गया | बाहर आते ही हवाओं ने मुझे छेड़ दिया |

सारा वातावरण Chand की रौशनी में नहाया हुआ था | दूर तक शांत | मुझे अपना Chand याद आ गया | मैंने आसमान वाले Chand को देखना चाहा तो हवाओं ने बादलों को धकेलते हुए हमारे बीच ला खड़ा किया | बड़ी दुष्ट हैं ये हवाएं, ये हमेशा यूँही परेशान करतीं हैं | कोई आज की बात नहीं है, बहुत पुराना रिश्ता है मेरा हवाओं से | Short Fantasy Stories in Hindi

मैं वापस अंदर आ गया | मैंने Laptop में उसके Photo खोल लिए और देखने लगा | उसने कल ही तो भेजे थे पाँच Photo | बस एक Photo पर नज़र ठहर गयी और मन बावरा खोने लगा | उस के ख्वाबों का ताना बाना बुनने में कब नींद आयी पता नहीं, मैं Chair पर बैठे-बैठे Table पर मुँह रख कर सो गया |

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आह, इतनी गहरी और तृप्त कर देने वाली नींद | पिछली चारों रातों की नींद पूरी करके ही उठता अगर वो मुझे आकर नहीं उठाती | सिर्फ़ बीस मिनट ही तो सोया था अभी, पर इस कमबख्त को मुझे सताने में बड़ा मजा आता है | उठा ही दिया मुझे | दिल हुआ कि गुस्सा करूँ, डांटू मगर उसकी सादगी, भोलापन और, ये जो अभी-अभी हँसी, यही वाली नटखट मुस्कुराहट, देखते ही सारा गुस्सा गायब हो जाता है | सच, झूठा गुस्सा भी नहीं किया जाता | हँसी आ जाती है | कल भी तो मैं हंस दिया था और वो भी खिलखिलाकर हंस दी |

“सारे दरवाज़े तो बंद थे तब तुम कहाँ से आई और इतनी रात को क्यों ?”

“तुम ही तो मुझे खुले Laptop में अकेले, बिना Good Night बोले छोड़कर सो गए” |

Good Night कहा तब जाकर वो गई, लेकिन पांचवी रात भी पहले वाली रातों की तरह ही निकल गई | Short Fantasy Stories in Hindi

सोचता हूँ उसके Photo Delete कर दूँ तो कोई परेशान नहीं करेगा लेकिन सच कहूँ तो बहुत दिनों तक नहीं सो पाउँगा तुम्हारे बिना | आदत हो गई है तुम्हारी, तुम्हे Good Night बोलने की, परेशान होने की | मगर तुम हमेशा Photo से निकलकर Laptop की खिड़की से क्यों आती हो ? मेरे घर में दरवाज़ा भी है और दिन भी निकलता है | Please अगली बार दिन में घर के दरवाज़े से आना, मुझे परेशान करने | मैं इंतजार कर रहा हूँ, बोलो, तुम आओगे ना ? Short Fantasy Stories in Hindi

Writer – Parvesh Kumar “PK”

तुम किसी बुरी लत की तरह हो

तुम्हे पता है ? तुम बहुत बुरी हो, किसी बुरी लत की तरह | ना…ना, शराब नहीं, उससे भी बुरी लत | अगर मुझे पहले पता होता तुम्हारी लत इतनी बुरी होगी, तो कसम से, मैं कभी तुम्हारे पास से भी नहीं गुजरता | तुम्हे देखते ही रास्ता बदल लेता | लेकिन बचना मेरी किस्मत में शायद लिखा ही नहीं था | हाँ, हाँ, कह लो जो किया मैंने ही किया | यही तो तुम्हारी खासियत है, सबकुछ करके भी साफ़ बच निकलती हो | वो वक़्त अलग था जब तुम्हारी गलतियाँ अपने सिर लेना अच्छा लगता था | लेकिन अब मिल जाओ तो तुम्हे अपने हाथों से मार डालूँ और फ़िर खूब रोऊँ | ना, नहीं रोऊंगा, और अगर रोऊंगा भी तो मैं तुम्हे क्यों बता रहा हूँ ? Short Fantasy Stories

याद है, जब पहली बार तुम्हारे कमरे पर आया तो तुमने क्या मस्त खाना बनाया था | उस दिन तुम चावल भी बासमती ‘पैकेट वाले’ लायी थी | क्या पनीर बनाया था ! बिलकुल वैसे ही जैसे बकरे को हलाल करने से पहले खिलाया जाता है | और नहीं तो क्या, बाद में भूल गयी जब शरारत करते वक़्त तुमने मेरी गर्दन पर नाख़ून मार दिए थे | जब वहाँ से खून निकलने लगा तो, तुमने अपने होंठों से मेरी गर्दन को चूम लिया था | Short Fantasy Stories in Hindi

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बस उसी दिन से मेरे खून में तुम्हारा नशा मिल गया और मेरे शरीर में दौड़ने लगा | मेरे पूरे शरीर से तुम्हारी खुशबू आती है | तभी तो मुझे तुम्हारी लत लगी थी | तुम सच में कोई जादूगरनी हो, दूसरी दुनिया की शायद |

मैं आज भी तुम्हे सोचता हूँ, तुम्हे याद करता हूँ मुझे पता है ये तुम भी जानती हो, क्योंकि इधर मैं अपनी कलम से कुछ लिखता हूँ उधर ये हवाएं तुम्हे सब बता देती हैं | हो तो तुम जादूगरनी ही | लेकिन ज्यादा इतराओ मत | जल्दी ही मैं तुम्हे भुला दूँगा | मैं क्यों तड़पता रहूँ, छोड़कर तो तुम गयी थी, तुम ही तो चाहती थी कि मैं तुम्हारी शर्तों पे जियूं | तुम्हारी गलती है तुमने आसमान को मुठ्ठी में बांधना चाहा, समुंद्र को समेटना चाहा | Short Fantasy Stories in Hindi

सोचता हूँ अपनी नस काट दूँ, और बहने दूँ खून को, के जब तक तुम्हारा नशा ना बह जाए, के जब तक तुम्हारी खुशबू है, के जब तक तुम्हारी लत है | लेकिन मुझे जीना है क्योंकि पहले तुम्हे जाना पड़ेगा | तुम्हे जाना ही पड़ेगा, ताकि मैं किसी और का हो सकूँ, ताकि मैं चैन से मरने की हिम्मत कर सकूँ, ताकि मैं थोड़ा और जी सकूँ | मैंने कोशिश भी शुरू कर दी है, जीने की | सच, मेरी एक प्रेमिका है, तुमसे खूबसूरत तुमसे अच्छी, और उसकी कोई शर्त भी नहीं है बस उसमे तुम्हारे जितना नशा नहीं है | लेकिन मुझमे है ना नशा, तुम्हारा ही सही |

खैर, अभी तुम मरना मत, तुम्हे मेरी और उसकी शादी देखनी है, उसके बाद जो मर्जी करना | मेरी कलम में स्याही ख़त्म होने वाली है | मैं चलता हूँ, मुझे अपनी प्रेमिका को पत्र लिखना है | प्लीज तुम अभी मरना मत | Short Fantasy Stories in Hindi

Writer – Parvesh Kumar “PK”

Short Fantasy Stories in Hindi

वो अब चाँद को देखता भी नहीं.

उसका कोई दोस्त नहीं था, बस कलम से दोस्ती थी | जब किसी से मिलने का मन होता तो वो कलम उठा लेता और कागज़ पर दोनों खूब बातें करते | लेकिन कभी-कभी दोनों घंटों खामोश बैठे रहते |

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पता नहीं लिखने का शौक कहाँ से आ गया था, अब और कुछ उसे भाता ही नहीं था | एक दिन किसी ने पूछ लिया ‘क्या करते हो?’ | ‘लिखता हूँ’ | सुनते ही पूछने वाले ने कहा – ‘कवि, लेखक तो समाज का दर्पण होता है |” Short Fantasy Stories in Hindi

ये बात दिल में बैठ गयी और उसने रातों को जागना शुरू कर दिया क्योंकि दिन तो उसने बचपन से देखे थे | रात में चाँद से बाते करता तो तारे भी आ जाते और सबकी खूब बैठक लगती | सुबह होने लगती तो चाँद को मजबूरी में जाना पड़ता | Short Fantasy Stories

अब उसे सूरज से मुलाकात में कोई मजा नहीं आता, बस रात का, चाँद का, तारों का इंतजार रहता | रोज चाँद उसे दूसरी दुनिया के किस्से कहानी सुनाता और वो अपनी कलम से लिखता जाता | लेकिन सूरज को जब पता चला तो उसने रात बादलों को पहरे पर बिठा दिया | अब बदल उसे चाँद से मिलने ही ना देते | Sad Boy And Moon

उसे बादलों पर गुस्सा आया | एक दिन बेवफा हवा ने सूरज की चुगली कर दी तो उसे सूरज से भी नफरत हो गयी | वो दिनभर सूरज से दूर रहता और रात होते ही अपनी कलम के साथ चाँद की तलाश में सड़कों पर निकल जाता |

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उसे चाँद तो नहीं मिला, तारों ने भी मिलना बंद कर दिया | मिलते भी तो बातें ना करते | अब वो सड़क से बातें करता, स्ट्रीट लाइट से बातें करता और कभी-कभी तो रात के आवारा कुत्तों से भी बाते करता | Short Fantasy Stories in Hindi

सड़क, स्ट्रीट लाइट और आवारा कुत्तों ने जो उसे इस दुनिया की कहानियाँ सुनायी तो उसके हाथ कांपने लगे, उस से कुछ लिखते ना बना | लेकिन ‘कवि, लेखक तो समाज का दर्पण होता है’ बात दिलो-दिमाग में बैठी हुई थी | सो उसने अब चाँद का इंतजार छोड़ दिया | अब सड़क, स्ट्रीट लाइट और रात के आवारा कुत्तों से दोस्ती है | और वो कभी नहीं रुठते, किसी की साजिशों में भी नहीं आते |

अब उसके हाथ भी कांपने बंद हो गए हैं, वो दर्पण बनने की तैयारी कर रहा है | वो अब भी कलम हाथ में लेकर रातों को निकलता है लेकिन अब वो चाँद को देखता भी नहीं | Short Fantasy Stories in Hindi

Writer – Parvesh Kumar “PK”

गर्म Beer पी चुका, अब ठंडी चाय पीनी है.

चाय का कप उठाया और वापस टेबल पर रख दिया | शायद चाय बहुत गरम थी | वो सोफे पर पीठ टिकाये बैठ गया और कप के ऊपर हवाओं के साथ उड़ते धुंए में देखने लगा | धुंए के साथ उसका मन भी उड़ गया | Short Fantasy Stories in Hindi

मन, जिसे सपनों की दुनिया से बहुत प्यार था | वहाँ सबकुछ तो था, समुंद्र किनारे की रेत, दोस्त और हाँ Drink भी, वो भी दोस्तों के साथ | वे दोस्त, जो अब सिर्फ Facebook पर मिलते हैं, लेकिन कभी साथ बैठ कर बातें भी करते थे, पार्टी भी करते और Drink भी करते थे |

उसे जिस दिन दोस्तों से मिलना होता तो कलम उठाता और दोस्तों के लिए कुछ लाइन लिखता और Facebook पर Post कर देता | सपने में फिर सारे दोस्त आते, जिन्हें Tag किया होता | लेकिन आज दोस्त Beer भी साथ लाये थे, क्योंकि आज की Post में Beer का ज़िक्र था | Akbar Birbal Ke Kisse Aur Kahaniya

उसके आते ही उसकी Drink तैयार कर दी गयी | उसने उस दिन Ice Cubes डालने से मना कर दिया, शायद वो एक दोस्त को ढूँढ रहा था, जिसे Tag भी किया था, लेकिन वो आया नहीं था | आज उस दोस्त ने Post भी Like नहीं की, ना अब मिलने आया | Short Fantasy Stories

तभी सबने Cheers कहा और सबके साथ वो भी Beer पी गया, गर्म Beer, एक ही घूँट में | दोबारा Drink तैयार होने लगी लेकिन उसका मन उसी दोस्त में लगा रहा | उसने अपनी कलम उठायी और फिर कुछ लिखने लगा और लिखकर फिर Facebook पर Post कर दिया |

इस Post में उसने सिर्फ उसी दोस्त को Tag किया, सिर्फ उसी के बारे में लिखा, ना Beer, ना Drink, | हाँ, चाय का ज़िक्र था, शायद दोस्त के साथ बैठ कर चाय पीने का मन किया होगा | लेकिन वो दोस्त अब भी नहीं आया | Short Fantasy Stories in Hindi

उसने आँखें खोल दी, मन भी वापस आ गया, बिना दोस्त से मिले, गर्म Beer पीकर और अब उसे ठंडी चाय पीनी है |

Writer – Parvesh Kumar “PK”